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बलात्कारी मानसिकता का सच

                              बलात्कारी मानसिकता का सच


निस्संदेह Rapes कानून में नरमी की वजह से भी हो रहे हैं (ऐसा अक्सर दबंग, नेताओं द्वारा किये जानें वाले लैंगिक अपराधों में देखने को मिलता है...और हाल ही में U.P के BJP mla द्वारा अंजाम दिया गया Rape Case इसका उदाहरण है)
लेकिन *मात्र कानून में कठोरता का अभाव* केवल यही Rape जैसे अपराध की वजह नहीं है....
 वैसे भी भारत में POCSO जैसे act के बाद कम-से-कम नाबालिगों से Rape commit करनें वालों का अंजाम लंबी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद अंत में फांसी की सज़ा ही होता है....फिर भी Rapes (Specially minors के साथ) हो रहे हैं यानी सिर्फ कानूनों के Level पर ही दिक्कत नहीं है और भी कई जगह है...

👉🏻 *Society के level पर दिक्कत*

हम एक Segregated Society(बंद समाज) में रहते हैं... यहां अधिकतर मामलों में एक 18-20-22 साल के लड़के/पुरुष नें अपनी परिवार की चचेरी-ममेरी बहनों के अलावा किसी विपरीत Gender के शख्स से कभी 5 मिनट भी बात ही नहीं की होती है... उसनें सिर्फ देखा होता है सड़क के किनारे चलते हुए, बस स्टैंड में....एक ऐसे बंद समाज में ही ऐसे पुरुष उत्पन्न होते हैं जो नारियों को एक इन्सान नहीं एक शरीर/जिस्म/आकृति/मनोरंजन और तुष्टी की वस्तु समझते हैं...और वे दूर से ही देख कर अपनें अंदर तरह-2 की कुंठायें,पूर्वाग्रह लिए और बिना interact किये समझेंगे भी कैसे किसी विपरीत Gender की संवेदना...यहीं से होता है Rapist सोच का जन्म...
(आज-कल नौजवान और कम उम्र के Rapists के संदर्भ में यह case रहता है)
Rapist भी तो इसी society की पैदाइश है...वे भी तो इसी Indian Society के किसी परिवार से निकलते हैं...

हमारी Society ही Rapist तैयार करती है समाधान यही है कि Society को open minded बनना पड़ेगा

👉🏻 *लैंगिक हिंसा के पीछे बड़ा कारण वर्ग विभेद भी है*

एक तरफ हमारी society में elite class(upper & middle class) है तो दूसरी तरफ अभावग्रस्त गरीब वर्ग...दोनों का lifestyle और स्थितियां एक दूसरे के ठीक 180° पर हैं...

Upper-middle class में लोग शिक्षित,open society, women Liberty को समझने वाले, वेश-भूषा में खुलापन और western fashion sense वाले हैं
जबकि अभावग्रस्त तबके‌ Lifestyle के क्रम में न पढ़े लिखे होते हैं..न वे नारी आजादी के मर्म को समझते हैं..एक बंद और नारियों पर का हावी रहने वाले अतिपुरूषप्रधान संकुचित परिवेश के कारण उन तबके के लोगों को उनकी अबोधता के कारण ये लग सकता है कि किसी का एक विशेष तरीके से Dress up, विशेष लाईफ Style होना(किसी female का लड़कों के साथ घूमना/Night Club जाना/wine/cigarette पीना उसके लिए उकसावा है....इस मानसिकता की वजह से इस पृष्ठभूमि के लोगों नें लैंगिक हिंसा को अंजाम दिया है.
(निर्भया Case के Rapist आरोपियों के संदर्भ में यही case था)
और इसमें भी दोष समाज/सरकार का है कि गरीब तबके के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक-(Mentality)धारणात्मक-Lifestyle के स्तर पर हम एक देश/समाज के स्तर पर हम उनकी तरक्की और विकास नहीं कर पाये जो वे ऐसे मनोविकारों से ग्रस्त हो गये हैं...


👉🏻 *Parents / Teachers अपनी पथप्रदर्शक की भूमिका नहीं निभाते*

वे(Sex Education,Sexuality,Puberty, Puberty में आनें वाले बदलावों, Sexual Crimes करनें और शिकार होनें से बचनें) जैसे इन मुद्दों पर खुल कर बात ही नहीं करते......अगर इन पर किसी समझदार से ज्ञान मिलता तो शोषक पुरूषों को Rape जैसी जघन्य अपराधी सोच रखनें पर भी हीनता महसूस होती है....Rape Commit करना तो दूर की बात है..

हमें कैसे नागरिक तैयार करनें हैं(Rapist या Humanist) ये School/College और परिवार ही तय कर सकते हैं..

*जब आपका परिवार होगा तो संगठन की उम्मीद है कि आप इस पर काम करेंगे*

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